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केएमसी बजट : 111 करोड़ का घाटा

पिछले साल की तुलना में घाटे में 3 करोड़ की कमी

13 Feb 2026

केएमसी बजट : 111 करोड़ का घाटा

कोलकाता। कोलकाता नगर निगम के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मेयर फिरहाद हकीम द्वारा पेश किए गए इस बजट में 111 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान जताया गया है, जिसे लेकर विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का कहना है कि नगर निगम का मुख्य कार्य बुनियादी नागरिक सुविधाएं प्रदान करना है, लेकिन मेयर के बजट भाषण में जनहित की सेवाओं से ज्यादा राज्य सरकार की लक्खी भंडार योजना का गुणगान किया गया। बजट दस्तावेजों के अनुसार, आगामी वित्त वर्ष में निगम की संभावित आय 5791.43 करोड़ और व्यय 5902.43 करोड़ आंका गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस घाटे में महज तीन करोड़ रुपये की ही कमी आई है, जबकि उम्मीद जताई जा रही थी कि चुनाव से पहले इसे 100 करोड़ के नीचे लाया जाएगा। नगर निगम की आर्थिक स्थिति और प्राथमिकताओं को लेकर विपक्षी पार्षदों ने सदन में भारी आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा और वामदलों के प्रतिनिधियों का तर्क है कि जब शहर की सड़कें, नाली, पेयजल और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं सुधार की बाट जोह रही हैं, तब मेयर ने राज्य की सामाजिक योजना को बजट भाषण के केंद्र में क्यों रखा। 
मेयर ने अपने संबोधन में बताया कि कोलकाता की करीब सात लाख 83 हजार महिलाएं लक्खी भंडार योजना का लाभ उठा रही हैं और अब उन्हें एक हजार के बजाय 1500 रु. प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। चूंकि मेयर के दूसरे कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण बजट है, इसलिए राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। बजट पर चर्चा के दौरान जुबानी जंग ने भी नया मोड़ ले लिया है। भाजपा पार्षद सजल घोष और माकपा की मधुछंदा देवरा जैसे विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या निगम अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पूर्व में केंद्रीय बजट को हंप्टी-डंप्टी कहे जाने पर पलटवार करते हुए अब भाजपा ने निगम के बजट को ही हंप्टी-डंप्टी करार दिया है। स्पष्ट है कि चुनावी वर्ष में पेश किए गए इस बजट में आंकड़ों की बाजीगरी से ज्यादा राजनीतिक संदेशों और श्रेय लेने की होड़ हावी दिख रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 111 करोड़ के इस घाटे वाले बजट का असर शहर के विकास कार्यों पर किस तरह पड़ता है।

पार्ट टाइम मेयर का पार्ट टाइम बजट  :विजय ओझा
पार्षद विजय ओझा ने आरोप लगाया कि यह कोई नया बजट नहीं है, बल्कि पिछले साल के बजट पर नया जिल्द चढ़ाकर पेश किया गया है। उनके मुताबिक, बजट में न तो नई सोच दिखाई देती है और न ही शहर के लिए कोई अभिनव योजना। उन्होंने कहा कि घोषणाएं दोहराई गई हैं और ठोस वित्तीय सुधार या राजस्व बढ़ाने की स्पष्ट रणनीति सामने नहीं रखी गई।ओझा ने मेयर पर तंज कसते हुए कहा कि फिरहाद खुद पार्ट-टाइम मेयर हैं, इसलिए पार्ट-टाइम बजट पढ़ रहे हैं। उनका आरोप है कि नगर निगम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को पूर्णकालिक और गंभीर नेतृत्व की आवश्यकता है, जबकि मौजूदा स्थिति में प्रशासनिक प्राथमिकता स्पष्ट नहीं दिखती। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में सड़क, जल निकासी, कचरा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन बजट में इन मुद्दों के समाधान के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव है।

यह दिशाहीन बजट: मीना पुरोहित
केएमसी के 111 करोड़ रुपये के घाटे वाले बजट को लेकर अब सियासी घमासान खुलकर सामने आ गया है। भाजपा पार्षद मीना पुरोहित ने मेयर फिऱहाद हकीम पर तीखा हमला बोलते हुए बजट को दिशाहीन और अव्यवस्थित करार दिया है। मीना ने कहा कि मेयर को बांग्ला पढऩा नहीं आता। मीना पुरोहित ने आरोप लगाया कि मेयर को बांग्ला भाषा ठीक से पढऩी नहीं आती और उन्होंने बजट को जल्दबाजी में गलत तरीके से पढ़कर सदन से बाहर चले गए। उनके मुताबिक, यह नगर निगम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट पेश करने जैसे गंभीर विषय में तैयारी और स्पष्टता का अभाव साफ दिखाई दिया। भाजपा पार्षद ने कहा कि बजट में शहर के दीर्घकालिक विकास की कोई ठोस योजना सामने नहीं रखी गई है। सड़क, जल निकासी, पेयजल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर केवल सामान्य घोषणाएं की गई हैं, लेकिन वित्तीय संसाधन और क्रियान्वयन की स्पष्ट रणनीति का अभाव है। उनका कहना है कि जब नगर निगम पहले से आर्थिक दबाव में है, तब घाटे का बजट पेश करना और बिना ठोस राजस्व मॉडल के योजनाओं की घोषणा करना शहर के भविष्य के लिए चिंताजनक है। मीना पुरोहित ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केएमसी के कॉन्ट्रैक्ट लेबर को समय पर भुगतान नहीं किया जाता। इससे हजारों श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पूछा कि जब निगम अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में सक्षम नहीं है, तो विकास और जनसेवा के दावे कैसे पूरे किए जाएंगे।उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के बकाया भुगतान को प्राथमिकता दी जाए और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।

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